रांची, 2 सितंबर: ISKCON रांची की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की दामोदर लीला के भाव में डूबे नजर आए। हरिनाम संकीर्तन, कथा, आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत उत्साहपूर्ण हरिनाम संकीर्तन से हुई। मृदंग-करताल की मधुर ताल और सामूहिक हरे कृष्ण महामंत्र के गान से पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा।
इसके बाद श्री लीलापुरुषोत्तम दास ने श्रीमद्भागवत कथा में यशोदा-दामोदर की उखल बंधन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में किए जाने वाले सभी कार्यों का अंतिम उद्देश्य भगवान की प्रसन्नता होना चाहिए। भगवद्गीता की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए मनुष्य अपने जीवन को भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ा सकता है।
दामोदर लीला के माध्यम से उन्होंने बताया कि सर्वशक्तिमान भगवान श्रीकृष्ण भी अपने भक्त के निष्कपट प्रेम और भक्ति के सामने स्वयं को बांधने देते हैं। भगवान को भौतिक शक्ति से नहीं, बल्कि प्रेम और भक्तिमय सेवा से बांधा जा सकता है। कथा में श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं के आपसी संबंधों पर भी प्रकाश डाला गया।
समापन पर पुनः हरिनाम संकीर्तन और आरती हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच भगवान को अर्पित प्रसाद का वितरण किया गया। कीर्तन, कथा और आरती से सजी शाम श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद का अनुभव बनी।
ISKCON रांची के अनुसार, यह आयोजन आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पूर्व आयोजित कार्यक्रमों का हिस्सा है। संस्था ने श्रद्धालुओं और आमजन से आगामी कार्यक्रमों में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा, हरिनाम संकीर्तन और जन्माष्टमी महोत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।






