
संतोष पाठक
रांची। झारखंड सरकार भले ही “सबके लिए मुफ्त स्वास्थ्य व्यवस्था” का दावा करती हो, लेकिन राजधानी रांची के सदर अस्पताल की जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था, लंबी कतारें और दलालों का बोलबाला मरीजों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा रहा है।
अस्पताल में मेडिसिन ओपीडी से लेकर ब्लड जांच तक हर जगह मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। ब्लड जांच के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना आम बात है। वहीं दूसरी ओर, यदि कोई मरीज दलालों के संपर्क में आ जाए तो उसका काम चंद मिनटों में हो जाता है। आरोप है कि केवल जांच की रसीद कटवाने के नाम पर मरीजों से भारी रकम वसूली जाती है। कई मामलों में एक जांच के लिए ₹1200 तक की रसीद काटी जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन के लिए फेको मशीन (Phaco Machine) उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि हेमंत सोरेन सरकार के पहले कार्यकाल में खरीदी गई यह मशीन वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हुई है। कभी लेंस की कमी तो कभी अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर मरीजों को टाल दिया जाता है।
सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का यह केवल एक उदाहरण है। अस्पताल परिसर में फैली अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।
आप सभी सुधी पाठकों से आग्रह है कि एक बार स्वयं रांची सदर अस्पताल का दौरा करें और वहां की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अपनी आंखों से देखें। :::
थंबनेल के लिए आकर्षक हेडलाइन:
“सदर अस्पताल में मरीजों का खून चूसने का खेल!”
“मुफ्त इलाज या खुली लूट?”
“दलाल राज में फंसे मरीज!”
“₹1200 की जांच, घंटों की लाइन!”
“रांची सदर अस्पताल: व्यवस्था पर बड़ा सवाल”






