श्रमर्बिंदु संवाददाता
रांची : कई मीडिया हाउस के द्वारा समाचार की संपूर्ण रूप से पुष्टि के बिना किसी एक सोर्स के हवाले से समाचार प्रसारित कर दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने की चर्चाएं यदा कदा चलती रहती है। एक बार फिर से हजारीबाग जिले में एक ऐसी ही घटना हुई है। जिसका खंडन करते हुए खनन कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड द्वारा प्रकाशित खबरों को भ्रामक बताते हुए उस पर गहरी निराशा जताई गई है।
झारखंड के कुछ प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में हजारीबाग जिले के केरेडारी अंचल में चंद्रगुप्त परियोजना से सबंधित वन भूमि दस्तावेज़ को गायब एवं हेराफेरी करने , भूमि की प्रकृति जाँचे बिना 417 एकड़ सी0 सी0 एल0 को आवंटित करने एवं 25 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से अरबों रुपये के घोटाले संबन्धित समाचार विगत दिनों में प्रकाशित हुए हैं ।
उल्लेखनीय है कि चंद्रगुप्त परियोजना के लिए कोयला मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कुल 1495 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण सी0 बी0 ए0 ( ए एंड डी ) अधिनियम , 1957 के अंतर्गत की गई है एवं यह सी0 सी0 एल0 में निहित है । इस 1495 हे0 भूमि में से 699.38 हे0 वन भूमि का अपयोजन राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकार से जांचोपरांत अनुसंशा के आलोक में वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अनुमोदित है । उपरोक्त 417 एकड़ भूमि , 699.38 हे0 अपयोजित वन भूमि के अंतर्गत नहीं है।
वन , पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग , झारखंड सरकार के पत्रांक 4715 दिनांक 27/11/2018 के आलोक में उपायुक्त ,हजारीबाग के पत्रांक 2350 दिनांक 25/06/2022 द्वारा प्रपत्र -। में एवं मुख्य प्रबन्धक , चंद्रगुप्त परियोजना द्वारा प्रपत्र-।। में वांछित वचनबद्धता दी गई है । प्रपत्र-। में भूमि से संबन्धित मौज़ा , थाना , प्लॉट न0 एवं रकवा उल्लेखित है । प्रपत्र-।। में उपायुक्त ,हजारीबाग के पत्रांक 2350 दिनांक 25/06/2022 का उल्लेख किया गया है । सुलभ संदर्भ हेतु यह वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन के परिवेश पोर्टल पर सूचनाएँ उपलब्ध हैं ।
कुछ समाचार पत्र में प्रकाशित भूमि मुआवज़ा प्रति एकड़ 25 लाख रूपये एवं अरबों रुपये के घोटाले का समाचार शत- प्रतिशत गलत है । उपरोक्त 417 एकड़ भूमि के बदले में किसी भी रैयत अथवा राज्य सरकार को सी0 सी0 एल0 द्वारा भूमि के मुआवजे का भुगतान अबतक नहीं किया गया है । संदर्भित भूमि का सत्यापन जब तक नहीं होता है तब तक किसी को भी इसका लाभ नहीं दिया गया है एवं ना ही किसी को दिया जा सकता है ।
इस परियोजना के लिए सुशी इन्फ्रा एण्ड माइनिंग लिमिटेड कंपनी को एम0 डी0 ओ0 के रूप में नियुक्त किया गया है । इस नियुक्ति के पूर्व EC एवं FC की बाध्यता नहीं होती है ।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार भ्रामक हैं ।






