June 16, 2024 1:09 pm

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एक बार फिर आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष चुने गये सुदेश महतो

• नवनिर्माण के संकल्पों को पूरे कर स्वशासन से सुशासन लायेंगेः सुदेश कुमार महतो

रांची : राज्य में सरकार पोषित भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े शंखनाद के संकल्प के साथ आजसू का तीन दिवसीय महासम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में कई प्रस्ताव पास हुए और एक बार फिर से सुदेश कुमार महतो को आजसू पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई। अपने अध्यक्षीय भाषण में पार्टी सुप्रीमो ने हेमंत सरकार पर जमकर प्रहार किया और कहा कि जो शासन कमजोर, गैरजवाबदेह, भ्रष्टाचार में संलिप्त हो और बेलगाम भ्रष्टाचारियों के हाथों खेलता हो, आम आदमी, पंच, गांव की चौपाल की सत्ता में भागीदारी शून्य हो, तो वहां सुशासन की बात बेमानी होगी। हेमंत सोरेन की सत्तासीन सरकार में झारखंड की यही तस्वीर ऊभऱी है। सुशासन और स्वशासन में आम सहमति, जवाबदेही महत्वपूर्ण होता है। हम और हमारी पार्टी ने झारखंड नवनिर्माण के नौ संकल्पों के साथ स्वशासन से सुशासन तक का लक्ष्य रखा है। इसमें झारखंडी हक और अधिकार सुनिश्चित किये जायेंगे। राज्य के सपनों को जगाने के लिए आजसू पार्टी आगे बढ़ चुकी है।

इससे पहले केंद्रीय समिति के चुनाव को सर्वसम्मति से सुदेश कुमांर महतो को एक बार पार्टी का केद्रीय अध्यक्ष चुना गया। चुनाव पर्यवेक्षक की भूमिका डोमन सिंह मुंडा ने निभायी। उमाकांत रजक ने सभा के समक्ष सुदेश कुमार महतो का नाम रखा, जिसे सभी सदन ने ध्वनिमत से समर्थन किया। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने गर्मजोशी से अध्यक्ष का स्वागत किया।

उन्होंने अपना विज़न प्रस्तुत करते हुए कहा कि सुशासन से मेरा मतलब झारखंडी विचारों, विषयों, आम सहमति, जवाबदेही, उत्तरदायी का अनुसरण और आम आदमी को सत्ता का भागीदार बनाना होगा। सामाजिक न्याय और विकास आधारित होगा।

परतंत्र भारत में स्वतंत्रता संग्राम का उद्गम झारखंड वर्तमान समय में राजनीतिक भटकाव, आर्थिक ,दिशाहीनता, प्रशासनिक कुव्यवस्था , टूटते भरोसे, डूबती उम्मीद एवं बिखरते सपनों का खंडहर प्रदेश बन गया है। राजनीतिक नेताओं की घटती विश्वसनीयता से झारखंड के जनमानस में उपजी घनघोर निराशा एवं सुलगते आक्रोश की यह हालत तब है, जबकि झारखंड में सिंहासन पर झारखंड आंदोलन की कोख से जन्मे पार्टी के राजकुमार विराजमान हैं । मूलवासी आदिवासी के लिए संघर्ष करते-करते सत्ताधारी पार्टी का शीर्ष नेतृत्वआज इस वर्ग का शोषक बन गया है ।
इस अधिवेशन में आम जनता ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में उपजी शून्यता में आजसू की भूमिका एवं जिम्मेदारी पर गहन मंथन किया है।
पार्टी का उद्देश्य पिछड़े, दलितों एवं अल्पसंख्यकों को राजनीतिक और सामिजक तौर पर उनका वाजिब हक दिलाना तथा सत्ता/ शासन में उनके जनसंख्या के अनुपात में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।

आजसू दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक के युवाओं एवं महिलाओं को गोल बंद कर समाज के सभी वर्गों के सहयोग से स्वशासन से सुशासन तक के समाज एवं व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन का बिगुल फूंकेगा। हम किसी भी राजनीतिक परिदृश्य एवं समीकरण में झारखंडी अस्मिता एवं पहचान तथा पिछड़ों, अल्पसंख्यकों एवं दलितों के हितो के साथ कभी भी समझौता नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन का आदिवासी दर्शन यही है कि सत्ता के भागीदारों को पांच किलो चावल और छोती साड़ी देकर उन्हें हाशिये पर रखना है। जबकि सुदेश महतो का आदिवासी दर्शन क्रांतकारी सिदो- कान्हू, वीर बिरसा, बुधू भगत, जयपाल सिंह, टाना भगत हैं।

• झारखंड नवनिर्माण के लिए नौ संकल्प
आजसू पार्टी यह संकल्प लेती है कि झारखंडी मूलवासियों को उनका हक अधिकार हर हाल में दिलाना सुनिश्चित करेगी। रोजगार मुखी कृषि, उद्योग, खनन, निर्माण, पर्यटन एवं पर्यावरण के संरक्षण और संवधर्न के लिए काम किये जायेंगे। सामाजिक न्याय, राजनीतिक भागीदारी, महिला सशक्तिकरण, एवं जातीय जनगणना के लिए हर मोर्चे पर मुखर रहेंगे।
हमने राज्य के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के वास्ते रोडमैप तैयार कर लिया है। गाँव का विकास गांव वाले तय करेंगे,
आजसू का एक- एक कार्यकर्ता हमारा लीडर है और राज्य का निर्माणकर्ता। हर कार्यकर्ता को नेता के रूप में काम करना होगा, जो सबकी चिंता करे। हम गठबंधन करेगे, लेकिन यह राज्य की अस्मिता पर नहीं होगा। राज्य की अस्मिता पर आंच नहीं आने देंगे।

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